श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 116: कौरव-पाण्डव महारथियोंके द्वन्द्वयुद्धका वर्णन तथा भीष्मका पराक्रम  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  6.116.66 
रथाग्न्यगारश्चापार्चिरसिशक्तिगदेन्धन:।
शरसंघमहाज्वाल: क्षत्रियान् समरेऽदहत्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
वह रणभूमि में अग्नि के समान प्रज्वलित होकर क्षत्रियों को जला रहा था। रथ ही अग्नि-कक्ष था, धनुष ज्वाला के समान प्रज्वलित था, तलवार, भाला और गदा ईंधन का काम कर रहे थे, बाणों का समूह उस अग्नि की महान ज्वाला थी।
 
He was burning the Kshatriyas in the battlefield, blazing like fire. The chariot itself was the fire chamber, the bow appeared like flames, the sword, spear and mace were acting as fuel, the mass of arrows was the great flame of that fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)