श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 116: कौरव-पाण्डव महारथियोंके द्वन्द्वयुद्धका वर्णन तथा भीष्मका पराक्रम  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  6.116.32-33h 
सौभद्र: कोसलेन्द्रं तु विव्याधाष्टभिरायसै:॥ ३२॥
नाकम्पयत संग्रामे विव्याध च पुन: शरै:।
 
 
अनुवाद
तब सुभद्रा के पुत्र ने कोसलराज को आठ लोहे के बाणों से घायल कर दिया, परन्तु युद्ध में उसे विचलित न कर सका। इसके बाद उसने पुनः अनेक बाणों से बृहद्बल को घायल कर दिया।
 
Then Subhadra's son pierced the King of Kosal with eight iron arrows but could not disturb him in the battle. After this he again wounded Brihadbal with many arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)