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mahabharat 6.114.47: महाराज! महारथियों में श्रेष्ठ भीष्म ने भी युद्ध के लिए अपनी ओर आती हुई उस विशाल सेना को उसी प्रकार ग्रहण किया, जैसे समुद्र तट को ग्रहण कर लेता है।   |   mahabharat अध्याय 6.114: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंके साथ युद्धमें भीमसेन और अर्जुनका अद्भुत पुरुषार्थ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 114: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंके साथ युद्धमें भीमसेन और अर्जुनका अद्भुत पुरुषार्थ  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  6.114.47 
भीष्मोऽपि रथिनां श्रेष्ठ: प्रतिजग्राह तां चमूम्।
आपतन्तीं महाराज वेलामिव महोदधि:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! महारथियों में श्रेष्ठ भीष्म ने भी युद्ध के लिए अपनी ओर आती हुई उस विशाल सेना को उसी प्रकार ग्रहण किया, जैसे समुद्र तट को ग्रहण कर लेता है।
 
Maharaj! Bhishma, that best of charioteers, also received that huge army coming towards him for battle just as the ocean receives the shore.
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि भीमार्जुनपराक्रमे चतुर्दशाधिकशततमोऽध्याय:॥ ११४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें भीमसेन और अर्जुनका पराक्रमविषयक एक सौ चौदहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११४॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठके १ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ४८ १/२ श्लोक हैं।]
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)