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mahabharat 6.114.36: तत्पश्चात् युद्धभूमि में युद्ध के प्रतापी भीमसेन ने पिता के समान पूजनीय गुरु द्रोणाचार्य को पैंसठ बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.114: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंके साथ युद्धमें भीमसेन और अर्जुनका अद्भुत पुरुषार्थ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.114.36 
तं भीम: समरश्लाघी गुरुं पितृसमं रणे।
विव्याध पञ्चभिर्भल्लैस्तथा षष्टॺा च भारत॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् युद्धभूमि में युद्ध के प्रतापी भीमसेन ने पिता के समान पूजनीय गुरु द्रोणाचार्य को पैंसठ बाणों से घायल कर दिया।
 
Then, on the battlefield, Bhimasena, who had the glory of war, wounded Guru Dronacharya, who was revered like a father, with sixty-five arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)