उत्पतन्ति हि मे बाणा धनु: प्रस्फुरतीव च।
योगमस्त्राणि गच्छन्ति क्रूरे मे वर्तते मति:॥ ५॥
अनुवाद
मेरे बाण तरकस से निकल पड़े हैं, मेरा धनुष टंकारने लगा है, मेरे हथियार धनुष पर चढ़ गए हैं और मेरा मन क्रूर कर्म करने का विचार कर रहा है॥5॥
‘My arrows leap out from the quiver, my bow starts quivering, my weapons attach themselves to the bow and my mind is contemplating to commit cruel acts.॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥