युधिष्ठिरस्य च क्रोधो भीष्मश्चार्जुनसङ्गत:।
मम चास्त्रसमारम्भ: प्रजानामशिवं ध्रुवम्॥ २१॥
अनुवाद
युधिष्ठिर का क्रोध, भीष्म और अर्जुन का युद्ध तथा मेरा नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग करना - ये तीनों घटनाएँ निश्चय ही प्रजा के लिए दुर्भाग्य की सूचक हैं॥ 21॥
Yudhishthira's anger, the fighting between Bhishma and Arjuna, and my efforts to use my various weapons - these three events are certainly indicative of misfortune for the people.॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥