श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 111: कौरव-पाण्डवपक्षके प्रमुख महारथियोंके द्वन्द्व-युद्धका वर्णन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  6.111.58 
सा वध्यमाना समरे पुत्रस्य तव वाहिनी।
लोडॺते रथिभि: श्रेष्ठैस्तत्र तत्रैव भारत॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! उस युद्ध में आपके पुत्र की सम्पूर्ण सेना श्रेष्ठ महारथियों द्वारा सर्वत्र बाणों से पराजित हो गई॥58॥
 
Bharatnandan! In that battle, your son's entire army was defeated by the best charioteers with arrows everywhere. 58॥
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि द्वन्द्वयुद्धे एकादशाधिकशततमोऽध्याय:॥ १११॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें द्वन्द्वयुद्धविषयक एक सौ ग्यारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १११॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ श्लोक मिलाकर कुल ६१ श्लोक हैं।]
 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas