श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 111: कौरव-पाण्डवपक्षके प्रमुख महारथियोंके द्वन्द्व-युद्धका वर्णन  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  6.111.42-43h 
आजघान महाबाहु: पार्षतं तं महारथम्।
तं चैव पार्षतो राजन् हार्दिक्यं नवभि: शरै:॥ ४२॥
विव्याध निशितैस्तीक्ष्णै: कङ्कपत्रैरजिह्मगै:।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार महाबाहु कृतवर्मा ने महायोद्धा धृष्टद्युम्न को अत्यन्त घायल कर दिया। राजन! तत्पश्चात धृष्टद्युम्न ने भी कंकण से विभूषित नौ सीधे एवं तीखे बाणों से कृतवर्मा को क्षत-विक्षत कर दिया। 42 1/2॥
 
In this way the mighty-armed Kritavarman deeply hurt the great warrior Dhrishtadyumna. Rajan! Then Dhrishtadyumna also mutilated Kritavarma with nine straight and sharp arrows adorned with pebbles. 42 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas