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श्लोक 6.111.32-33  |
तथैव पाण्डवो राजञ्छारद्वतममर्षणम्॥ ३२॥
आजघानोरसि क्रुद्धो भीष्मस्य वधकाङ्क्षया।
तयोर्युद्धं समभवद् घोररूपं भयावहम्॥ ३३॥ |
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| अनुवाद |
| राजन! इसी प्रकार पाण्डुकुमार सहदेव ने भी क्रोधित होकर भीष्म को मार डालने की इच्छा से अमरशील कृपाचार्य की छाती पर अपने बाणों से प्रहार किया। उन दोनों का युद्ध अत्यन्त भयंकर एवं भीषण हो गया। 32-33॥ |
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| Rajan! Similarly, Pandukumar Sahadeva also got angry and with the desire to kill Bhishma, he hit the chest of Amarsheel Kripacharya with his arrows. The war between them became very fierce and fierce. 32-33॥ |
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