श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 111: कौरव-पाण्डवपक्षके प्रमुख महारथियोंके द्वन्द्व-युद्धका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.111.16 
तथा कुरुत कौरव्या यथा व: सात्यको युधि।
न जीवन् प्रतिनिर्याति महतोऽस्माद् रथव्रजात्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कौरवों! तुम्हें ऐसा प्रयत्न करना चाहिए कि इस युद्ध में आये हुए सत्यपुरुष हमारे इस महान रथसमुदाय से जीवित बचकर न निकल सकें। 16॥
 
Kauravas! You should make such an effort that the Satyas who have come to this battle should not come out alive from this great chariot-community of ours. 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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