श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.110.35 
ललाटस्थैस्तु तैर्बाणै: शुशुभे पाण्डवो रणे।
यथा मेरुर्महाराज शृङ्गैरत्यर्थमुच्छ्रितै:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
उन बाणों को ललाट में लगाकर पाण्डु नन्दन अर्जुन युद्धस्थल में उसी प्रकार शोभायमान हो रहे थे, जैसे मेरु पर्वत अपने तीन अत्यन्त ऊँचे शिखरों से सुशोभित है ॥35॥
 
With those arrows stuck in his forehead, Pandu Nandan Arjuna became beautiful in the battle in the same way as Mount Meru is adorned with its three very high peaks. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)