श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 11: शाकद्वीपका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.11.23 
तत: परं कौरवेन्द्र दुर्गशैलो महोदय:।
केसर: केसरयुतो यतो वात: प्रवर्तते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
कौरवराज! श्यामगिरि के बाद शैल नामक एक बहुत ऊँचा किला है। उसके बाद केसर पर्वत है, जहाँ से केसर की सुगंध लेकर हवा बहती है॥ 23॥
 
Kauravaraj! After Shyamgiri there is a very high fort called Shail. After that is Kesar Parvat, from where the wind blows carrying the fragrance of saffron.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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