श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 11: शाकद्वीपका वर्णन  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  6.11.21-22 
संजय उवाच
सर्वेष्वेव महाराज द्वीपेषु कुरुनन्दन।
गौर: कृष्णश्च वर्णौ द्वौ तयोर्वर्णान्तरं नृप॥ २१॥
श्यामो यस्मात् प्रवृत्तो वै तत् ते वक्ष्यामि भारत।
आस्तेऽत्र भगवान‍् कृष्णस्तत्कान्त्या श्यामतां गत:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
संजय बोले - "महाराज कुरुनंदन! समस्त द्वीपों में श्वेत, श्याम तथा इन दोनों का मिश्रण दिखाई देता है। भारत! मैं तुम्हें बताता हूँ कि यह पर्वत क्यों श्याम वर्ण का हो गया तथा अन्यों को भी श्याम वर्ण का क्यों कर दिया। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण निवास करते हैं; अतः उनके तेज से यह पर्वत श्याम वर्ण का हो गया है (तथा अपने समीप रहने वालों को भी श्याम वर्ण का कर देता है)।" ॥ 21-22॥
 
Sanjaya said, "Maharaj Kuru Nandan! In all the islands, fair, black and a mixture of these two colours can be seen. Bhaarat! I will tell you the reason why this mountain became dark and caused dark colour in others as well. Lord Krishna resides here; hence, due to His radiance, this mountain has (itself) attained dark colour (and causes dark colour in the people living near it as well). ॥ 21-22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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