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श्लोक 6.11.12-13h  |
धृतराष्ट्र उवाच
शाकद्वीपस्य संक्षेपो यथावदिह संजय॥ १२॥
उक्तस्त्वया महाप्राज्ञ विस्तरं ब्रूहि तत्त्वत:। |
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| अनुवाद |
| धृतराष्ट्र बोले - महाबुद्धिमान संजय ! यहाँ तुमने शाकद्वीप का संक्षेप में और यथार्थ वर्णन किया है। अब इसका यथार्थ परिचय कुछ विस्तार सहित दो ॥12 1/2॥ |
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| Dhritarashtra said – Great wise Sanjay! Here you have described Shakadweep briefly and exactly as it is. Now give its exact introduction with some detail. 12 1/2॥ |
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