श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 109: भीष्म और दुर्योधनका संवाद तथा भीष्मके द्वारा लाखों सैनिकोंका संहार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.109.4 
न मृष्यामि रणे भीष्मं प्रत्युद्यातं शिखण्डिना।
कच्चिन्न रथभङ्गोऽस्य धनुर्वाशीर्यतास्यत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मैं यह बात सहन नहीं कर सकता कि शिखण्डी ने युद्धभूमि में भीष्म पर आक्रमण किया। क्या उनका रथ क्षतिग्रस्त हो गया था या उनके बाणों से उनका धनुष टूट गया था?॥4॥
 
I cannot bear the fact that Shikhandi attacked Bhishma in the battlefield. Was his chariot damaged or was his bow broken into pieces by the arrows?॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)