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mahabharat 6.109.24-25: संजय कहते हैं - महाराज ! दुर्योधन की यह बात सुनकर आपके चाचा शान्तनु नन्दन देवव्रत ने कुछ देर विचार करके निश्चय किया और आपके पुत्र दुर्योधन को सान्त्वना देते हुए कहा - 'प्रजानाथ दुर्योधन ! शान्त होकर यहीं ध्यान लगाओ।   |   mahabharat अध्याय 6.109: भीष्म और दुर्योधनका संवाद तथा भीष्मके द्वारा लाखों सैनिकोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 109: भीष्म और दुर्योधनका संवाद तथा भीष्मके द्वारा लाखों सैनिकोंका संहार  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  6.109.24-25 
संजय उवाच
एवमुक्तो महाराज पिता देवव्रतस्तव।
चिन्तयित्वा मुहूर्तं तु कृत्वा निश्चयमात्मन:॥ २४॥
तव संधारयन् पुत्रमब्रवीच्छान्तनो: सुत:।
दुर्योधन विजानीहि स्थिरो भूत्वा विशाम्पते॥ २५॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज ! दुर्योधन की यह बात सुनकर आपके चाचा शान्तनु नन्दन देवव्रत ने कुछ देर विचार करके निश्चय किया और आपके पुत्र दुर्योधन को सान्त्वना देते हुए कहा - 'प्रजानाथ दुर्योधन ! शान्त होकर यहीं ध्यान लगाओ।
 
Sanjaya says - Maharaj! On hearing Duryodhan say this, your uncle Shantanu Nandan Devavrata, after thinking for a while, made up his mind and while consoling your son Duryodhana said - 'Prajanaath Duryodhana! Be calm and concentrate here.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)