श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  6.107.97 
पातयैनं रथात् पार्थ क्षत्रियं युद्धदुर्मदम्।
नाहत्वा युधि गाङ्गेयं विजयस्ते भविष्यति॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! तुम अपने रथ से युद्ध में कठोर क्षत्रिय योद्धा भीष्म को मार डालो। युद्धस्थल में गंगानन्दन भीष्म को मारे बिना तुम्हारी विजय नहीं होगी। 97॥
 
Parth! You kill the battle-hardened Kshatriya warrior Bhishma with your chariot. You will not be victorious without killing Ganganandan Bhishma in the battlefield. 97॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)