श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  6.107.96 
वासुदेव उवाच
प्रतिज्ञाय वधं जिष्णो पुरा भीष्मस्य संयुगे।
क्षत्रधर्मे स्थित: पार्थ कथं नैनं हनिष्यसि॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण बोले - विजयी कुन्तीकुमार ! तुम क्षत्रिय धर्म में स्थित हो । युद्ध में पहले भीष्म को मारने की प्रतिज्ञा करके अब तुम उन्हें कैसे नहीं मार सकते ?॥96॥
 
Lord Krishna said - Victorious Kuntikumar! You are established in the Kshatriya Dharma. Having vowed to kill Bhishma earlier in the war, how can you not kill him now?॥96॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)