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वासुदेव उवाच
प्रतिज्ञाय वधं जिष्णो पुरा भीष्मस्य संयुगे।
क्षत्रधर्मे स्थित: पार्थ कथं नैनं हनिष्यसि॥ ९६॥
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण बोले - विजयी कुन्तीकुमार ! तुम क्षत्रिय धर्म में स्थित हो । युद्ध में पहले भीष्म को मारने की प्रतिज्ञा करके अब तुम उन्हें कैसे नहीं मार सकते ?॥96॥
Lord Krishna said - Victorious Kuntikumar! You are established in the Kshatriya Dharma. Having vowed to kill Bhishma earlier in the war, how can you not kill him now?॥96॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥