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mahabharat 6.107.95: चाहे वे मेरी सेना का विनाश कर दें, फिर भी मैं विजयी हो जाऊँ या मर जाऊँ; परन्तु मैं उन महाबली भीष्म से अथवा श्रीकृष्ण से युद्ध नहीं करूँगा! तुम क्या उचित समझते हो?॥ 95॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  6.107.95 
कामं वध्यतु सैन्यं मे नाहं योत्स्ये महात्मना।
जयो वास्तु वधो वा मे कथं वा कृष्ण मन्यसे॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
चाहे वे मेरी सेना का विनाश कर दें, फिर भी मैं विजयी हो जाऊँ या मर जाऊँ; परन्तु मैं उन महाबली भीष्म से अथवा श्रीकृष्ण से युद्ध नहीं करूँगा! तुम क्या उचित समझते हो?॥ 95॥
 
Even if they destroy my army, I may be victorious or die; but I will not fight with that great Bhishma; or Shri Krishna! What do you think is right?॥ 95॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)