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mahabharat 6.107.9-10: तत्पश्चात् वह रात्रि आई जिसने समस्त भूतों को मायावी निद्रा में डाल दिया। उस भयंकर रात्रि के प्रारम्भ में वृष्णिवंशी तथा पाण्डवों सहित दुर्धर्ष सृंजय गुप्त मंत्रणा के लिए एक साथ बैठे। 9-10॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  6.107.9-10 
ततो रात्रि: समभवत् सर्वभूतप्रमोहिनी॥ ९॥
तस्मिन् रात्रिमुखे घोरे पाण्डवा वृष्णिभि: सह।
सृंजयाश्च दुराधर्षा मन्त्राय समुपाविशन्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वह रात्रि आई जिसने समस्त भूतों को मायावी निद्रा में डाल दिया। उस भयंकर रात्रि के प्रारम्भ में वृष्णिवंशी तथा पाण्डवों सहित दुर्धर्ष सृंजय गुप्त मंत्रणा के लिए एक साथ बैठे। 9-10॥
 
After that, the night came that put all the ghosts into a magical sleep. At the beginning of that terrible night, Durdharsh Srinjay along with the Vrishni clan and the Pandavas sat together for secret counselling. 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)