श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  6.107.89 
संजय उवाच
ते तु ज्ञात्वा तत: पार्था जग्मु: स्वशिबिरं प्रति।
अभिवाद्य महात्मानं भीष्मं कुरुपितामहम्॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! यह सब जानकर कुन्ती के सभी पुत्र कुरुकुल के वृद्ध पितामह महात्मा भीष्म को प्रणाम करके अपने शिविर की ओर चले गये।
 
Sanjay says- Rajan! Knowing all this, all the sons of Kunti bowed to the old grandfather of Kurukula, Mahatma Bhishma and went towards their camp.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)