श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 82-83h
 
 
श्लोक  6.107.82-83h 
जानन्ति च भवन्तोऽपि सर्वमेतद् यथातथम्।
अर्जुन: समरे शूर: पुरस्कृत्य शिखण्डिनम्॥ ८२॥
मामेव विशिखैस्तीक्ष्णैरभिद्रवतु दंशित:।
 
 
अनुवाद
आप सब जानते ही हैं कि ये सब कैसे हुआ। वीर अर्जुन युद्धभूमि में कवच धारण करके शिखण्डी को आगे करके तीखे बाणों से मुझ पर आक्रमण करें।
 
You all know how all these things happened. The valiant Arjuna should wear his armor in the battlefield and keeping Shikhandi in front, should attack me with sharp arrows. 82 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)