श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 80-81
 
 
श्लोक  6.107.80-81 
य एष द्रौपदो राजंस्तव सैन्ये महारथ:॥ ८०॥
शिखण्डी समरामर्षी शूरश्च समितिञ्जय:।
यथाभवच्च स्त्री पूर्वं पश्चात् पुुंस्त्वं समागत:॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
राजन! यह महायोद्धा द्रुपदपुत्र शिखण्डी आपकी सेना में है। यह वीर योद्धा है, वीरता से सम्पन्न है और युद्ध में विजयी है। पहले यह स्त्री था, फिर इसने पुरुषत्व प्राप्त किया। 80-81॥
 
Rajan! This great warrior Shikhandi, son of Drupada, is in your army, he is non-combatant, full of bravery and victorious in the battle. First he was a woman, then he attained manhood. 80-81॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)