श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 75-76
 
 
श्लोक  6.107.75-76 
भीष्म उवाच
सत्यमेतन्महाबाहो यथा वदसि पाण्डव॥ ७५॥
नाहं जेतुं रणे शक्य: सेन्द्रैरपि सुरासुरै:।
आत्तशस्त्रो रणे यत्तो गृहीतवरकार्मुक:॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "हे महाबाहो! पाण्डुपुत्र! आपकी बात सत्य है। जब तक मेरे हाथों में शस्त्र हैं, जब तक मैं उत्तम धनुष लेकर युद्ध के लिए सतर्क और तत्पर हूँ, तब तक इन्द्र, समस्त देवता और दानव भी मुझे रणभूमि में परास्त नहीं कर सकते।"
 
Bhishma said, "O mighty-armed one! Son of Pandu! What you say is true. As long as I have weapons in my hands, as long as I am alert and prepared for the war with the best bow, then even Indra, all the gods and demons cannot defeat me in the battlefield.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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