तथा ब्रुवाणं गाङ्गेयं प्रीतियुक्तं पुन: पुन:॥ ६१॥
उवाच राजा दीनात्मा प्रीतियुक्तमिदं वच:।
अनुवाद
जब गंगापुत्र भीष्म प्रसन्नतापूर्वक बार-बार ऐसा कह रहे थे, उस समय राजा युधिष्ठिर ने विनीत मन से प्रेमपूर्वक ये वचन कहे-॥61 1/2॥
When Ganga's son Bhishma was saying this happily again and again, at that time King Yudhishthira with a humble heart said these words lovingly -॥ 61 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥