vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना
»
श्लोक 58
श्लोक
6.107.58
पूजयन्तो महाराज पाण्डवा भरतर्षभम्।
प्रणम्य शिरसा चैनं भीष्मं शरणमभ्ययु:॥ ५८॥
अनुवाद
महाराज! पाण्डवों ने भरतश्रेष्ठ भीष्म को प्रणाम किया, उनके चरणों में सिर नवाकर उनकी शरण ली ॥58॥
Maharaj! The Pandavas worshipped the best of the Bharatas, Bhishma, bowing their heads at his feet and took refuge in him. ॥ 58॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas