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श्लोक 6.107.57  |
विमुक्तशस्त्रकवचा भीष्मस्य सदनं प्रति।
प्रविश्य च तदा भीष्मं शिरोभि: प्रणिपेदिरे॥ ५७॥ |
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| अनुवाद |
| वे सब लोग अपने अस्त्र-शस्त्र नीचे रख कर भीष्म के शिविर में गये और शिविर में प्रवेश करके उन्होंने सिर झुकाकर भीष्म को प्रणाम किया। |
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| All of them had put down their arms and armour. They went to Bhishma's camp and after entering it, they bowed their heads and saluted Bhishma. 57. |
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