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श्लोक 6.107.53  |
देवव्रत: कृती भीष्म: प्रेक्षितेनापि निर्दहेत्।
गम्यतां स वधोपायं प्रष्टुं सागरगासुत:॥ ५३॥ |
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| अनुवाद |
| ‘देवव्रत भीष्म पुण्यात्मा पुरुष हैं। वे दृष्टिमात्र से ही सबको भस्म कर सकते हैं; अतः तुम गंगानन्दन भीष्म के पास जाकर उनसे उनके वध का उपाय पूछो। 53॥ |
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| ‘Devvrat Bhishma is a virtuous man. He can burn everyone with just a glance; Therefore, you must go to Ganganandan Bhishma to ask him the solution to kill him. 53॥ |
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