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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना
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श्लोक 52
श्लोक
6.107.52
संजय उवाच
ततोऽब्रवीन्महाराज वार्ष्णेय: कुरुनन्दनम्।
रोचते मे महाप्राज्ञ राजेन्द्र तव भाषितम्॥ ५२॥
अनुवाद
संजय कहते हैं- महाराज! तब भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुनन्दन युधिष्ठिर से कहा- 'महामते राजेन्द्र! आपकी बात मुझे सही लगती है. 52॥
Sanjay says- Maharaj! Then Lord Shri Krishna said to Kurunandan Yudhishthir – ‘Mahamate Rajendra! Your statement seems correct to me. 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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