श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  6.107.51 
तं चेत् पितामहं वृद्धं हन्तुमिच्छामि माधव।
पितु: पितरमिष्टं च धिगस्तु क्षत्रजीविकाम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
माधव! यद्यपि वे हमारे पिता के पिता हैं और हमें प्रिय हैं, फिर भी मैं उन वृद्ध पितामह भीष्म को भी मारना चाहता हूँ। क्षत्रिय की इस जीविका को धिक्कार है! ॥51॥
 
Madhava! Although he is our father's father and dear to us, still I want to kill that old grandfather Bhishma also. Shame on this livelihood of a Kshatriya! ॥51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)