श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  6.107.42 
नियतं समवाप्स्यामि सर्वमेतद् यथेप्सितम्।
यस्य मे पुरुषव्याघ्र भवान् पक्षे व्यवस्थित:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
पुरुषसिंह! तुम जिसके पक्ष में खड़े हो, मैं उसकी समस्त इच्छाएँ अवश्य पूर्ण करूँगा ॥42॥
 
Purushsingh! I shall certainly fulfil all the desires of the one on whose side you are standing. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)