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श्लोक 6.107.41  |
युधिष्ठिर उवाच
एवमेतन्महाबाहो यथा वदसि माधव।
सर्वे ह्येते न पर्याप्तास्तव वेगविधारणे॥ ४१॥ |
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| अनुवाद |
| युधिष्ठिर बोले - हे महाबाहो! माधव! आप जैसा कहते हैं, वैसा ही है। ये समस्त कौरव आपके वेग को सहन करने में समर्थ नहीं हैं। ॥41॥ |
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| Yudhishthira said, "O mighty-armed one! Madhava! It is exactly as you say. All these Kauravas are not capable of bearing your speed." ॥ 41॥ |
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