श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.107.41 
युधिष्ठिर उवाच
एवमेतन्महाबाहो यथा वदसि माधव।
सर्वे ह्येते न पर्याप्तास्तव वेगविधारणे॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - हे महाबाहो! माधव! आप जैसा कहते हैं, वैसा ही है। ये समस्त कौरव आपके वेग को सहन करने में समर्थ नहीं हैं। ॥41॥
 
Yudhishthira said, "O mighty-armed one! Madhava! It is exactly as you say. All these Kauravas are not capable of bearing your speed." ॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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