श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.107.38 
स हनिष्यति संग्रामे भीष्मं परपुरञ्जयम्।
अशक्यमपि कुर्याद्धि रणे पार्थ: समुद्यत:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वे शत्रु नगरी को जीतनेवाले भीष्म को युद्ध में अवश्य मार डालेंगे। यदि कुन्तीपुत्र अर्जुन सावधान हो जाएँ तो युद्ध में असम्भव भी सम्भव हो सकता है ॥38॥
 
They will definitely kill Bhishma in battle who has conquered the enemy city. If Kunti's son Arjun becomes alert then even the impossible can be made possible in war. 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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