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श्लोक 6.107.38  |
स हनिष्यति संग्रामे भीष्मं परपुरञ्जयम्।
अशक्यमपि कुर्याद्धि रणे पार्थ: समुद्यत:॥ ३८॥ |
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| अनुवाद |
| वे शत्रु नगरी को जीतनेवाले भीष्म को युद्ध में अवश्य मार डालेंगे। यदि कुन्तीपुत्र अर्जुन सावधान हो जाएँ तो युद्ध में असम्भव भी सम्भव हो सकता है ॥38॥ |
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| They will definitely kill Bhishma in battle who has conquered the enemy city. If Kunti's son Arjun becomes alert then even the impossible can be made possible in war. 38॥ |
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