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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना
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श्लोक 25
श्लोक
6.107.25
एवं श्रुत्वा वचस्तस्य कारुण्याद् बहुविस्तरम्।
प्रत्युवाच तत: कृष्ण: सान्त्वयानो युधिष्ठिरम्॥ २५॥
अनुवाद
युधिष्ठिर के ये विस्तृत वचन सुनकर करुणा से प्रेरित होकर श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सान्त्वना देते हुए कहा, 25॥
Hearing these detailed words of Yudhishthira, inspired by compassion, Shri Krishna consoled Yudhishthira and said, 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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