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श्लोक 6.107.20  |
यथा प्रज्वलितं वह्निं पतङ्ग: समभिद्रवन्।
एकतो मृत्युमभ्येति तथाहं भीष्ममीयिवान्॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| जैसे पतंगा प्रज्वलित अग्नि की ओर केवल मृत्यु को प्राप्त होने के लिए ही दौड़ता है, वैसे ही हमने भी भीष्म पर आक्रमण करके केवल मृत्यु को ही चुना है॥ 20॥ |
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| Just like a kite running towards a blazing fire only to meet death, similarly by attacking Bhishma we too have chosen death only.॥ 20॥ |
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