Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.107.15-16h: जैसे महाबली तक्षक सर्प अपने भयंकर विष के कारण भयंकर प्रतीत होता है, उसी प्रकार जब क्रोध में भरे हुए महाबली भीष्म हाथ में धनुष लेकर युद्धभूमि में तीखे बाणों की वर्षा करने लगते हैं, तब वे अपने तीखे अस्त्रों के कारण अत्यन्त भयंकर प्रतीत होते हैं। | mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे महाबली तक्षक सर्प अपने भयंकर विष के कारण भयंकर प्रतीत होता है, उसी प्रकार जब क्रोध में भरे हुए महाबली भीष्म हाथ में धनुष लेकर युद्धभूमि में तीखे बाणों की वर्षा करने लगते हैं, तब वे अपने तीखे अस्त्रों के कारण अत्यन्त भयंकर प्रतीत होते हैं।
Just as the great serpent Takshak appears fearsome due to his potent poison, similarly when the mighty Bhishma, filled with anger, takes up his bow in his hand and starts showering sharp arrows on the battlefield, then he appears very fearsome due to his sharp weapons.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥