vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना
»
श्लोक 14
श्लोक
6.107.14
न चैवैनं महात्मानमुत्सहामो निरीक्षितुम्।
लेलिह्यमानं सैन्येषु प्रवृद्धमिव पावकम्॥ १४॥
अनुवाद
वह प्रज्वलित अग्नि के समान अपने बाणों की ज्वालाओं से हमारी सेना में सब को जलाकर भस्म कर रहा है। हम लोग उस महापुरुष की ओर देख भी नहीं सकते॥14॥
He is burning to ashes everyone in our army with the flames of his arrows like a blazing fire. We are not even able to look at this great man.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×