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श्लोक 6.107.104  |
ते वयं प्रमुखे तस्य पुरस्कृत्य शिखण्डिनम्।
गाङ्गेयं पातयिष्याम उपायेनेति मे मति:॥ १०४॥ |
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| अनुवाद |
| इसलिए मैं सोचता हूँ कि हम सब लोग शिखण्डी को उसके सामने खड़ा करके उस पर अस्त्र-शस्त्रों का प्रहार करके गंगानन्दन भीष्म को मार डालेंगे ॥104॥ |
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| Therefore I think that all of us will make Shikhandi stand in front of him and kill Ganganandan Bhishma by attacking him with weapons. ॥104॥ |
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