श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 105: दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये आदेश, युधिष्ठिर और नकुल-सहदेवके द्वारा शकुनिकी घुड़सवार-सेनाकी पराजय तथा शल्यके साथ उन सबका युद्ध  »  श्लोक d6-d7
 
 
श्लोक  6.105.d6-d7 
(आपतन्नेव भीमस्तु मद्रराजमताडयत्।
सर्वपारशवैस्तीक्ष्णैर्नाराचैर्मर्मभेदिभि:॥
ततो भीष्मश्च द्रोणश्च सैन्येन महता वृतौ।
राजानमभ्यपद्येतामञ्जसा शरवर्षिणौ॥ )
 
 
अनुवाद
भीमसेन ने आते ही मद्रराज शल्य को लोहे के बने, प्राण-भेदक तीखे बाणों से गहरा घाव कर दिया। तब दोनों महारथी भीष्म और द्रोणाचार्य अपनी विशाल सेना के साथ राजा शल्य की रक्षा के लिए वहाँ पहुँचे और उन पर बाणों की वर्षा करने लगे।
 
As soon as Bhimsena arrived, he inflicted a deep wound on Madra king Shalya with sharp arrows made of iron and capable of piercing vital spots. Then both the great warriors Bhishma and Dronacharya arrived there with their huge army to protect King Shalya, showering arrows on him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)