तदापतद् वै सहसा शल्यस्य सुमहद् बलम्॥ २९॥
महौघवेगं समरे वारयामास पाण्डव:।
मद्रराजं च समरे धर्मराजो महारथ:॥ ३०॥
अनुवाद
उस समय पाण्डुपुत्र महायोद्धा धर्मराज युधिष्ठिर ने अपनी ओर आती हुई राजा शल्य की विशाल सेना तथा स्वयं मद्रराज को भी युद्धभूमि में जल के प्रचण्ड प्रवाह के समान रोक दिया।
At that time, the great warrior Dharmaraja Yudhishthira, son of Pandu, stopped King Shalya's huge army coming towards him as well as the Madra king himself, like a great flow of water on the battlefield.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥