श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 105: दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये आदेश, युधिष्ठिर और नकुल-सहदेवके द्वारा शकुनिकी घुड़सवार-सेनाकी पराजय तथा शल्यके साथ उन सबका युद्ध  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  6.105.28-29h 
पुत्रस्य तव तद् वाक्यं श्रुत्वा शल्य: प्रतापवान्॥ २८॥
स ययौ रथवंशेन यत्र राजा युधिष्ठिर:।
 
 
अनुवाद
हे राजन! आपके पुत्र की यह बात सुनकर महाबली राजा शल्य अपने रथों सहित उसी स्थान पर गये जहाँ राजा युधिष्ठिर उपस्थित थे।
 
O King! On hearing these words of your son, the mighty King Shalya along with his chariots went to the same place where King Yudhishthira was present.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)