श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 105: दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये आदेश, युधिष्ठिर और नकुल-सहदेवके द्वारा शकुनिकी घुड़सवार-सेनाकी पराजय तथा शल्यके साथ उन सबका युद्ध  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  6.105.23-24h 
वध्यमाना हयाश्चैव प्राद्रवन्त भयार्दिता:॥ २३॥
यथा सिंहं समासाद्य मृगा: प्राणपरायणा:।
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार सिंह का सामना होने पर हिरण भयभीत होकर अपनी जान बचाने के लिए भागते हैं, उसी प्रकार मारे जा रहे घोड़े भी घबराकर इधर-उधर भाग रहे थे।
 
Just as deer become frightened and run to save their lives when they encounter a lion, similarly the horses being killed were running here and there in panic and fear. 23 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)