श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 105: दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये आदेश, युधिष्ठिर और नकुल-सहदेवके द्वारा शकुनिकी घुड़सवार-सेनाकी पराजय तथा शल्यके साथ उन सबका युद्ध  »  श्लोक 16-18h
 
 
श्लोक  6.105.16-18h 
ततो युधिष्ठिरो राजा माद्रीपुत्रौ च पाण्डवौ॥ १६॥
प्रत्यघ्नंस्तरसा वेगं समरे हयसादिनाम्।
उद्‍वृत्तस्य महाराज प्रावृट्कालेऽतिपूर्यत:॥ १७॥
पौर्णमास्यामम्बुवेगं यथा वेला महोदधे:।
 
 
अनुवाद
महाराज! तब राजा युधिष्ठिर तथा पाण्डुपुत्र नकुल और सहदेव ने युद्धस्थल में उन घुड़सवारों के वेग को नष्ट कर दिया। जैसे पूर्णिमा के दिन समुद्र के जल से परिपूर्ण हो जाने और अपनी सीमा का उल्लंघन कर देने पर समुद्र का किनारा उसके बढ़े हुए वेग को रोक देता है।
 
Maharaj! Then King Yudhishthira and the sons of Pandu, Nakul and Sahadeva, destroyed the speed of those horsemen in the battlefield. Just like the shore of the sea stops the increased speed of the sea on the full moon day when it becomes full of water and breaks its limits.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)