श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 105: दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये आदेश, युधिष्ठिर और नकुल-सहदेवके द्वारा शकुनिकी घुड़सवार-सेनाकी पराजय तथा शल्यके साथ उन सबका युद्ध  »  श्लोक 1-2h
 
 
श्लोक  6.105.1-2h 
संजय उवाच
दृष्ट्वा भीष्मं रणे क्रुद्धं पाण्डवैरभिसंवृतम्।
यथा मेघैर्महाराज तपान्ते दिवि भास्करम्॥ १॥
दुर्योधनो महाराज दु:शासनमभाषत।
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज! जैसे ग्रीष्म ऋतु के अन्त में (वर्षा के प्रारम्भ में) आकाश में बादल सूर्य को ढक लेते हैं, वैसे ही पाण्डवों ने युद्धस्थल में कुपित भीष्म को चारों ओर से घेर लिया है। यह देखकर आपके पुत्र दुर्योधन ने दु:शासन से कहा -॥1 1/2॥
 
Sanjaya says - Maharaj! Just as the clouds cover the Sun in the sky at the end of summer (at the beginning of monsoon), similarly the Pandavas have surrounded the enraged Bhishma from all sides in the battlefield. Seeing this, your son Duryodhan said to Dushasan -॥ 1 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)