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mahabharat 6.104.3: यह देखकर इन्द्र के पुत्र महाबली अर्जुन ने अपने बाणों से सुशर्मा को रोक दिया और युद्धभूमि में उसके योद्धाओं को यमलोक भेजने लगे।   |   mahabharat अध्याय 6.104: अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय, कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका घोर युद्ध, अभिमन्युसे चित्रसेनकी, द्रोणसे द्रुपदकी और भीमसेनसे बाह्लीककी पराजय तथा सात्यकि और भीष्मका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 104: अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय, कौरव-पाण्डव-सैनिकोंका घोर युद्ध, अभिमन्युसे चित्रसेनकी, द्रोणसे द्रुपदकी और भीमसेनसे बाह्लीककी पराजय तथा सात्यकि और भीष्मका युद्ध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.104.3 
तं निवार्य शरौघेण शक्रसूनुर्महारथ:।
सुशर्मणो रणे योद्धान् प्राहिणोद् यमसादनम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर इन्द्र के पुत्र महाबली अर्जुन ने अपने बाणों से सुशर्मा को रोक दिया और युद्धभूमि में उसके योद्धाओं को यमलोक भेजने लगे।
 
Seeing this, the mighty warrior Arjun, son of Indra, stopped Susharma with his arrows and began sending his warriors to Yamaloka on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)