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mahabharat 6.103.38: जिस प्रकार वैतरणी नदी मरे हुओं को भूतों के राजा की नगरी में ले जाती है, उसी प्रकार वह रक्त से सनी नदी डरपोकों और कायरों को युद्धभूमि से बेहोश करके भगा देती थी।   |   mahabharat अध्याय 6.103: उभय पक्षकी सेनाओंका घमासान युद्ध और रक्तमयी रणनदीका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 103: उभय पक्षकी सेनाओंका घमासान युद्ध और रक्तमयी रणनदीका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.103.38 
अपोवाह रणे भीरून् कश्मलेनाभिसंवृतान्।
यथा वैतरणी प्रेतान् प्रेतराजपुरं प्रति॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार वैतरणी नदी मरे हुओं को भूतों के राजा की नगरी में ले जाती है, उसी प्रकार वह रक्त से सनी नदी डरपोकों और कायरों को युद्धभूमि से बेहोश करके भगा देती थी।
 
Just as the river Vaitarni carries the dead to the city of the king of ghosts, in the same way that blood-soaked river drove the timid and cowards unconscious away from the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)