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mahabharat 6.103.34: वह हड्डियों के ढेर जैसी चट्टानों से भरा हुआ था। बाल घास और खरपतवार जैसे लग रहे थे। रथ गड्ढे जैसा और बाण भँवर जैसे लग रहे थे। घोड़े उस दुर्गम नदी में मछलियों जैसे लग रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.103: उभय पक्षकी सेनाओंका घमासान युद्ध और रक्तमयी रणनदीका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 103: उभय पक्षकी सेनाओंका घमासान युद्ध और रक्तमयी रणनदीका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.103.34 
अस्थिसंघातसम्बाधा केशशैवलशाद्वला।
रथह्रदा शरावर्ता हयमीना दुरासदा॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वह हड्डियों के ढेर जैसी चट्टानों से भरा हुआ था। बाल घास और खरपतवार जैसे लग रहे थे। रथ गड्ढे जैसा और बाण भँवर जैसे लग रहे थे। घोड़े उस दुर्गम नदी में मछलियों जैसे लग रहे थे।
 
It was filled with rocks like a mass of bones. The hair itself appeared like grass and weeds. The chariot appeared like a pit and the arrows like a whirlpool. The horses were like fishes in that inaccessible river.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)