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mahabharat 6.103.32: हे राजन! युद्धस्थल में अनेक घोड़ों ने पैदल सैनिकों को कुचल डाला। हे राजन! इस प्रकार वे सैनिक एक-दूसरे को बार-बार कुचलते रहे।   |   mahabharat अध्याय 6.103: उभय पक्षकी सेनाओंका घमासान युद्ध और रक्तमयी रणनदीका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.103.32 
व्यमृद्नन् समरे राजंस्तुरगाश्च नरान् रणे।
एवं ते बहुधा राजन् प्रत्यमृद्नन् परस्परम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! युद्धस्थल में अनेक घोड़ों ने पैदल सैनिकों को कुचल डाला। हे राजन! इस प्रकार वे सैनिक एक-दूसरे को बार-बार कुचलते रहे।
 
O lord of kings! In the battlefield many horses crushed the men on foot. O king! In this manner those soldiers kept on crushing each other many times.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)