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mahabharat 6.103.30: उस महासमर में एक हाथी दौड़ता हुआ दूसरे हाथी के पास पहुँच गया और उसके पीछे-पीछे चलने लगा, और अपने वेग से बहुत से पैदल सैनिकों और घोड़ों को कुचलता हुआ आगे बढ़ गया।   |   mahabharat अध्याय 6.103: उभय पक्षकी सेनाओंका घमासान युद्ध और रक्तमयी रणनदीका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.103.30 
गजो गजं समासाद्य द्रवमाणं महाहवे।
ययौ प्रमृद्य तरसा पादातान् वाजिनस्तथा॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
उस महासमर में एक हाथी दौड़ता हुआ दूसरे हाथी के पास पहुँच गया और उसके पीछे-पीछे चलने लगा, और अपने वेग से बहुत से पैदल सैनिकों और घोड़ों को कुचलता हुआ आगे बढ़ गया।
 
In that great battle, one running elephant reached near another elephant and followed it, crushing with its speed many infantry soldiers and horses. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)