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mahabharat 6.103.10: महाराज! उनके बाणों से अत्यन्त घायल हो जाने के कारण वे रक्त से भीग गये और वसन्त ऋतु में पुष्पों से भरे हुए रक्त से भीगे हुए तालाब के समान शोभायमान होने लगे।   |   mahabharat अध्याय 6.103: उभय पक्षकी सेनाओंका घमासान युद्ध और रक्तमयी रणनदीका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 103: उभय पक्षकी सेनाओंका घमासान युद्ध और रक्तमयी रणनदीका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.103.10 
सोऽतिविद्धो महाराज शोणितौघपरिप्लुत:।
वसन्ते पुष्पशबलो रक्ताशोक इवाबभौ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उनके बाणों से अत्यन्त घायल हो जाने के कारण वे रक्त से भीग गये और वसन्त ऋतु में पुष्पों से भरे हुए रक्त से भीगे हुए तालाब के समान शोभायमान होने लगे।
 
Maharaj! Due to being severely injured by their arrows, they were drenched in blood and started looking beautiful like a blood-soaked pond filled with flowers in the spring season.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)